राष्ट्रपिता ज्योतिराव फुले जी ने वैदिक धर्म के कर्मकांड को अस्वीकार कर 1873 में सत्यशोधक समाज की स्थापना की

राष्ट्रपिता ज्योतिराव फुले जी ने वैदिक धर्म के कर्मकांड को अस्वीकार कर 1873 में सत्यशोधक समाज  की स्थापना की

राष्ट्रपिता ज्योतिराव फुले जी ने वैदिक धर्म के कर्मकांड को अस्वीकार कर 1873 में सत्यशोधक समाज की स्थापना की। 14 8 2021को दौड़ तहसील में 39 वा और गिरीम ग्राम में 2 रा 1-30 बजें सत्यशोधक विवाह संपन्न होने वाला हैं।आज फुले जी के विचारों के आधार पर ओबीसी समाज में सत्यशोधक समाज निर्माण हो रहा हैं। वैदिक धर्मों का ओर पंरपरा का त्याग करके सत्यवादी विचार अपनाने लगे हैं । दौड़ तहसील में गिरीम गांव में रहने वाले शिव फुले शाहु आंबेडकर चळवळीतील हमारे साथी और मित्र सत्यशोधक मा. ज्ञानदेव (माऊली) जाधव और दौड़ तहसील में पाटस गांव के सत्यशोधक मा. चंद्रकांत तुकाराम भागवत इन दोनों परिवार ने अपने बच्चों की शादी ब्याह सत्यशोधक पद्धति से करने फेसला करके ओबीसी समाज में एक बदलाव लाया हैं।और फुले जी के राह पर चलने का संकल्प किया है, ये एक क्रांतिकारी बदलाव हैं।इन दोनों परिवार के सभी रिश्तेदारों और दोस्तों को बधाई। वधु-सत्यशोधीका आरती वर-सत्यशोधक शुभम ने सच्चाई की तलाश में सत्यशोधक विवाह करने का फेसला करके ओबीसी समाज में क्रांतिकारी बदलाव लाया हैं। महिलाओं को सर्वोच्च स्थान देने वाले इस समाज में एक और क्रांतिकारी परिवर्तन लाने का साहस किया है।मॉ सावित्रीमाई और राष्ट्रपिता ज्योतिराव फुले के विचारों पर आधारित समाज निर्माण करनें काम किया हैं। जय शिवराय जय ज्योति जय भीम जय सत्यशोधक जय मूलनिवासी

Indramal Mali

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