माली ज्ञाति जुनागढ की भानुबहन ने अपनी समाज (नात) को रुपये ५१००० हजार का दान।

माली ज्ञाति जुनागढ की भानुबहन ने अपनी समाज (नात) को रुपये ५१००० हजार का दान।

महात्मा कबीरदास जी की वाणी है। की जब हम पेदा हुए जग हसे हम रोए, ऐसी करनी कर चलो हम हसे जग रोए। मावन के शरीर को एक चांदर की उपाधि दी ऐसे संत कबीरजी का कहना है कि ऐसे कर्म ओर क्रार्य करे की महामुल्य इश्वर का दिया हुआ जिवन कर्मो से श्रेष्ठ बन जाए। यह कहावत का भावार्थ पोरबंदर की रहने वाली अपनी ज्ञाति के भानुबहन परमार परिवार को पूर्णता योग्यता हो ऎसे वहां बेठे जूनागढ़ की समाज को रुपये ५१००० हजार का दान ( दीक्षितभाई कनाडा ) ने भी तहेदिल से सन्मान कीया। कोई भी नामना के लिए नही ऐसा क्रार्य करना कठिन है। इसलिए यह भक्त कबीरदास की वाणी को अपने जीवन में उतारा है। परिवार की जीवन की राह मे नकद रुपये का दान देकर बहुत-बहुत अच्छा काम किया है। मुझे लगता है। आप भी ऐसा कार्य करेगे जो समाज को धन रूपी दान से फ़ायदा हो। जय श्री लखमाजी महाराज।

Ramesh Bhavan Bhai Mali

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