महात्मा ज्योतिबा फुले व सावित्री बाई को भारत रत्न देने की माली समाज की मांग।

महात्मा ज्योतिबा फुले व सावित्री बाई को भारत रत्न देने की माली समाज की मांग।

पुणे-संत श्री सावता माली युवा नवयुवक मंडल संघटना महाराष्ट्र के पुणे जिले के संगठन प्रमुख विशाल रघुनाथ गडगे ने प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखकर महान समाज सुधारक ज्योतिबा फुले माता सावित्रीबाई फुले को भारत रत्न का सम्मान देने के लिए सिफारिश की है। इस पत्र के माध्यम से उन्होंने माली समाज का प्रतिनिधित्व करते हुए महात्मा फुले व माता सावित्रीबाईद्वारा किए गए कार्यों का वर्णन किया और उनके इन प्रयासों को समाज सुधार के लिए एक अग्रणी कदम वह प्रयास बताया। और मांग की कि उनके समाज सुधार के लिए उन्हें भारत रत्न मिलना चाहिए।सावित्रीबाई और जोतिबा फुले इन्होने देश के विकास में अहम भूमिका अदा की है। अपने असाधारण कार्य के लिए दोनों भारतरत्न के हकदार हैं । देश के समाज सुधारकों में उनका विशिष्ट स्थान है । सावित्री बाई ने शिक्षाविद और समाजसेवी के रूप में महिला शिक्षा के क्षेत्र में काम किया है । 'सत्यशोधक आंदोलन' में उनका योगदान काफी चर्चित है । फुले दम्पती ने 19वीं शताब्दी में अन्यायपूर्ण जाति व्यवस्था के खिलाफ विद्रोह किया था। महात्मा जोतिराव गोविंदराव फुले एक भारतीय समाजसुधारक, समाज प्रबोधक, विचारक, समाजसेवी, लेखक, दार्शनिक तथा क्रान्तिकारी कार्यकर्ता थे। इन्हें महात्मा फुले एवं ''जोतिबा फुले के नाम से भी जाना जाता है। सितम्बर १८७३ में इन्होने महाराष्ट्र में सत्य शोधक समाज नामक संस्था का गठन किया। महिलाओं व दलितों के उत्थान के लिय इन्होंने अनेक कार्य किए। समाज के सभी वर्गो को शिक्षा प्रदान करने के ये प्रबल समथर्क थे। वे भारतीय समाज में प्रचलित जाति पर आधारित विभाजन और भेदभाव के विरुद्ध थे। उनका मूल उद्देश्य स्त्रियों को शिक्षा का अधिकार प्रदान करना, बाल विवाह का विरोध, विधवा विवाह का समर्थन करना रहा है। फुले समाज की कुप्रथा, अंधश्रद्धा की जाल से समाज को मुक्त करना चाहते थे। अपना सम्पूर्ण जीवन उन्होंने स्त्रियों को शिक्षा प्रदान कराने में, स्त्रियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने में व्यतीत किया। १९ वी सदी में स्त्रियों को शिक्षा नहीं दी जाती थी। फुले महिलाओं को स्त्री-पुरुष भेदभाव से बचाना चाहते थे। उन्होंने कन्याओं के लिए भारत देश की पहली पाठशाला पुणे में बनाई। स्त्रियों की तत्कालीन दयनीय स्थिति से फुले बहुत व्याकुल और दुखी होते थे इसीलिए उन्होंने दृढ़ निश्चय किया कि वे समाज में क्रांतिकारी बदलाव लाकर ही रहेंगे। उन्होंने अपनी धर्मपत्नी सावित्रीबाई फुले को स्वयं शिक्षा प्रदान की। सावित्रीबाई फुले भारत की प्रथम महिला अध्यापिका थीं। दलित व स्‍त्रीशिक्षा के क्षेत्र में दोनों पति-पत्‍नी ने मिलकर काम किया वह एक कर्मठ और समाजसेवी की भावना रखने वाले व्यक्ति थे।निर्धन तथा निर्बल वर्ग को न्याय दिलाने के लिए जोतिबा फुलेजी ने 'सत्यशोधक समाज' १८७३ मे स्थापित किया। उनकी समाजसेवा देखकर १८८८ ई. में मुंबई की एक विशाल सभा में उन्हें 'महात्मा' की उपाधि दी। ज्योतिबा ने ब्राह्मण-पुरोहित के बिना ही विवाह-संस्कार आरम्भ कराया और इसे मुंबई उच्च न्यायालय से भी मान्यता मिली। वे बाल-विवाह विरोधी और विधवा-विवाह के समर्थक थे।

PARAS MALI CHAUHAN

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