अंग्रेजी सरकार भी सैनी जाति को युद्ध प्रवीण जाति मानती थी

अंग्रेजी सरकार भी सैनी जाति को युद्ध प्रवीण जाति मानती थी

चीन युद्ध ( 1900 ई .) में जोधपुर के कर्नल सर प्रतापसिंह के नेतृत्व में जिस सरदार रिसाले ने भाग लिया उसमें रिसालदार चतुरसिंह कच्छवाहा व उनके छोटे भाई धूड़सिंह दफेदार के रूप में थे । उन्होंने काबुल व सीमान्त क्षेत्रों के छोटे मोटे युद्धों में भी भाग लिया था । यहां एक बात ध्यान देने योग्य है कि जोधपुर राज्य के रिसाले में केवल युद्ध राजपूत ही लिए जाते थे । अंग्रेजी सरकार भी सैनी जाति को युद्ध प्रवीण जाति मानती थी । प्रथम महायुद्ध में पंजाब से दो सैनी रेजीमेंट थी व दक्षिण से करीब - करीब दस हजार सैनी योद्धा थे । ( बलदेव सिंह कच्छवाहा - सैनी समाज का इतिहास , पृ . सं .38 ।मारवाड़ की कौमों का इतिहास व रीत रस्म - रिपोर्ट मर्दुमशुमारी सन् 1891 ई भाग तीन , पृ . सं . - 559 ) । अपने स्वर्णिम इतिहास पर समाज के लोगों को अपने आप में गौरवान्वित होना चाहिए ।

Sona  Devi

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Maliyo Ka Mhola Didwana, कलवानी रोड सर्किल के पास, Nagaur, Rajasthan

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