राष्ट्रीय फुले ब्रिगेड द्वारा मनाई गई महात्मा ज्योतिबा फुले की जन्म जयंती

राष्ट्रीय फुले ब्रिगेड द्वारा मनाई गई महात्मा ज्योतिबा फुले की जन्म जयंती

राष्ट्रीय फुले ब्रिगेड द्वारा मनाई गई महात्मा ज्योतिबा फुले की जन्म जयंती आज रविवार को महात्मा ज्योतिबा फुले की जन्म जयंती मंडी चौराहे के पास पब्लिक पार्क में मनाई गई इस उपलक्ष में जिला अध्यक्ष बबलू माली ने संबोधित करते हुए उनकी जीवनी पर प्रकाश डालने के लिए बताया कि सामाजिक क्रांति के जनक, महिला शिक्षा के जनक, साक्षरता आंदोलन के जनक, सामाजिक न्याय के प्रणेता, महात्मा गांधी के महात्मा एवं भीमराव अंबेडकर के गुरु तथा अनेक नामों से जाने पहचाने जाते हैं हमारे जन जन के लाडले महात्मा ज्योतिराव फुले उन्नीसवीं सदी में भारतीय समाज में अनेक बुराइयां जैसे वर्ग भेद ,वर्ण भेद,वर्ग सघर्ष, नारी अत्याचार, छुआछूत ,अश्पृयता,अशिक्षा तथा अनेक सामाजिक विषमताओं से हमारा देश घिरा हुआ था, उस समय पुणे ,महाराष्ट् के गोविंदराव माली के यहां 11 अप्रैल 1827 को एक ज्योति पुंज का अवतरण हुआ जिसे हम आज महात्मा ज्योति राव फूले के नाम से हर भारतीय नागरिक जानता है ज्योति राव फूले के जन्म से 1 वर्ष पश्चात ही उनकी माता चिमना भाई ने यह संसार छोड़ दिया और उनके पालन पोषण की जिम्मेदारी उनकी मौसी सुगना बाई ने पुत्रवत निभाई। उस समय भारत में अंग्रेजों का शासन था और 1833 में पूना मैं अंग्रेजी माध्यम के दो-तीन विद्यालय खोले गये उस समय ब्राह्मणवाद एवं सामंतवाद का बोल वाला था उस समय उच्च जाति के बालक ही विद्यालय में प्रवेश के पात्र थे कनिष्ट जाति बालकों को विद्यालय में शिक्षा नहीं दी जाती थी किंतु अंग्रेजी पाठशाला में कनिष्ट जाति के बालक भी शिक्षा अध्ययन कर सकते थे इस कारण सन 1834 में ज्योति राव को अंग्रेजी विद्यालय में प्रवेश मिल गया उनके प्रवेश पर उच्च जातियों ने विरोध किया और कहने लगे "कलयुग आ गया शिक्षा शुद्रो के घर आ गई" । उच्च वर्ग की जाति वालों ने ज्योति राव के पिता को समझाया तो ज्योति राव फुले ने 4 वर्ष तक शिक्षा ग्रहण करने के पश्चात स्कूल छोड़ दिया ज्योति राव दिन में खेती करते रात्रि में अध्ययन करते उर्दू फारसी के शिक्षक गफ्फार बैग एवं लिजित सर के प्रयासों से पुनः ज्योति राव फूले को सातवीं कक्षा में प्रवेश मिल गया और उन्होंने प्रथम श्रेणी में परीक्षा उत्तीर्ण की। 1840 में सातारा निवासी सावित्रीबाई से ज्योति राव फूले का विवाह संपन्न हुआ उस समय सावित्रीबाई फुले की आयु मात्र 9 वर्ष की थी एवं निरक्षर थी उस समय स्त्रियों को पैरों की जूती समझा जाता था महिलाओं को शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार नहीं था ऐसी विकट स्थिति में ज्योति राव फुले ने सावित्रीबाई को शिक्षित करने का फैसला लिया स्वयं दिन में विद्यालय जाते और रात्रि में सावित्रीबाई को अध्ययन कराते सावित्रीबाई जब 17 वर्ष की हुई तो उस समय पूर्ण प्रशिक्षित अध्यापिका बन गई इस प्रकार सावित्री बाई को उस समय देश की प्रथम महिला शिक्षक होने का गौरव प्राप्त हुआ 1948 में फूले दंपति ने बालिकाओं को शिक्षा देने के उद्देश्य से देश का प्रथम बालिका विद्यालय खोला उस समय बालिकाओं को शिक्षित करना समाज में अच्छा नहीं माना जाता था फिर भी फूले दंपतियों ने अभिभावकों से संपर्क कर शिक्षा के महत्व की जानकारी दी कुछ को अच्छी लगी और कुछ को अच्छी नहीं लगी किंतु प्रयत्न जारी रखा और उसका परिणाम यह हुआ कि प्रथम वर्ष 17 बालिकाओं को विद्यालय में प्रवेश मिल गया। समाज के लोगों को बालिका को शिक्षा देने की बात पची नहीं जब सावित्रीबाई बालिका विद्यालय में पढ़ाने जाती तो उन पर गोबर कीचड़ गंदगी डालकर उनके वस्त्रों को गंदा कर देते गालियां और अपशब्द कहते किंतु सावित्रीबाई ने हार नहीं मानी वह विद्यालय जा कर वस्त्र बदलकर बालिकाओं को शिक्षा देती रहती। फूले दंपति की मेहनत रंग लाई और 4 वर्ष में उन्होंने अट्ठारह बालिका विद्यालय खोल दिये साथ ही साथ प्रौढ़ एवं निरक्षर को शिक्षित करने के लिए रात्रि में प्रोढ़शाला खोलकर गरीब, पिछडे, शुद्रो एवं दलित को शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार दिलाकर उनके अधिकार एवं कर्तव्य के बारे में समझाया। इस प्रकार फूले दंपति ने शिक्षा की ज्योत जलाकर उनके जीवन में उजाला भर दिया। इस मौके पर मुख्य अतिथि श्याम जी जाट उपसरपंच पहलाद मेघवाल राष्ट्रय फुले ब्रिगेड जिला संगठन मंत्री दिनेश माली , ज़िला प्रभारी ओम प्रकाश माली ,सुरेश माली संतोष सेन ताराचंद माली नगर अध्यक्ष अनिल माली पार्षद जगदीश माली देवी लाल माली दशरथ माली अनिल माली कैलाश माली सुनील माली‌ गोविंद माली राष्ट्रीय फुले ब्रिगेड के सभी कार्यकर्ता उपस्थित थे राष्ट्रीय फुले ब्रिगेड टीम निम्बाहेड़ा ज़िला चित्तौड़गढ़ राजस्थान

Vaja Bhai Mali

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